नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। बुधवार को Brent crude oil की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। कच्चे तेल में इस तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।
Sensex 813 अंक से ज्यादा टूटा
बुधवार को BSE Sensex 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74,764.23 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 50 में 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,431.50 पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांक 11 जून के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इससे महंगाई और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रुपया भी 95 के पार
तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव भारतीय रुपये पर भी दिखाई दिया। बुधवार को रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया और कारोबार के अंत में करीब ₹95.1050 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
निवेशकों की चिंता बढ़ी
बाजार में गिरावट के दौरान 16 प्रमुख सेक्टरों में से 13 में कमजोरी रही। IT शेयरों पर विशेष दबाव दिखाई दिया और IT इंडेक्स करीब 3.2 प्रतिशत नीचे रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत और मध्य-पूर्व की स्थिति भारतीय बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में महंगाई, आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

