चित्रकूट। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण रामघाट समेत कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन और राहत-बचाव दल अलर्ट मोड पर हैं।
बताया जा रहा है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर लंबे अंतराल के बाद बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंचा है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़क और पुलों पर पानी आने से आवागमन भी बाधित हुआ है।
कई गांवों का संपर्क प्रभावित
बाढ़ के तेज बहाव के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। कुछ स्थानों पर सड़क का हिस्सा बह जाने की जानकारी सामने आई है। इससे आसपास के गांवों का मुख्य मार्गों से संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
झांसी-मिर्जापुर हाईवे के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ के पानी का असर बताया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचने की अपील की गई है।
SDRF और होमगार्ड की टीमें तैनात
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए SDRF और होमगार्ड की टीमों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन की टीमें लगातार जलस्तर और प्रभावित इलाकों की निगरानी कर रही हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
रामघाट और आसपास के इलाकों में बढ़ी चिंता
मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक क्षेत्र रामघाट और उसके आसपास के इलाकों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। नदी के किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष सावधानी बरत रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नदी का ऐसा उफान लंबे समय बाद देखने को मिला है। लगातार बारिश जारी रहने की स्थिति में जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
लोगों से सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के नजदीक न जाएं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सुरक्षित रखने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है।
फिलहाल चित्रकूट में राहत और बचाव कार्य जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

